Tuesday, May 14, 2013

पहला प्यार 
तुमसे मिलने से पहले नही जानते थे की प्यार क्या होता है
तुमसे बिछड़ने के बाद ये भी याद नही की यार क्या होता है
जिस शिदत से चाहा तुम्हे
फिर वो चाहत किसी और के लिए अपने दिल में ला नही पाया
क्योंकि मै तुम्हे ही दिल से कभी भुला  नही पाया
इसलिए  फिर किसी और को अपने दिल में बसा नही पाया
शायद तभी कहते है की पहला प्यार ही असली प्यार होता है
बाकी तो सब रिश्तो को व्यापार होता है
व्यापार में तो कामयाबी की ख़ुशी और
नाकामयाबी का गम छुपा होता है
पर पहले प्यार में तो न कोई अपनी ख़ुशी न कोई अपना गम
बस सब कुछ यार के चेहरे पर ही लिखा होता है
मुस्करा देता है यार अगर तो खुदा  हंस दिया
चुरा ली नजर कंही यार ने तो सारा जहान ही वीरान होता है
माना की हम चंद लम्हे ही संग संग गुजार पाए
पर कैसी होती जिन्दगी अगर वो गुजरती तुम्हारे साथ
इस सोच से कभी हम खुद को जुदा कर नही पाए
जिन्दगी की इस शाम में जब सांझ की किरने भी साथ छोड़ने को है
तब भी उषा की पहली  किरण को अब भी याद करता हूँ
ऐ रब जितना सोचता हूँ इतनी ही वफा हो मेरे यार में तो
मिलवाना सदा के लिए उससे अगले जन्म
नही तो  रखना इतनी ही छोटी मुलाकातमेरी  मेरे यार से कि
गुजार पाऊ याद में उस मुलाकात के, बाकी अपनी  जिन्दगी
बस इतनी फरियाद करता हूँ  
क्योंकि मै  व्यापार नही सिर्फ  प्यार करता हूँ, सिर्फ  प्यार करता हूँ।

लेखक : प्रवीन चन्द्र झांझी
      

No comments:

Post a Comment