रावण की व्यथा
कल जब मै दशहरा देखने गया
तो सुना कि रावण ने कुम्भकर्ण से कहा
ये लोग हमे तो सदियों से जलाते है
पर क्या इनको ये जिन्दा रावण घुमते हुए नजर नही आते है।
इतना ही नही ये कलयुग के दुष्ट रावण हमे देखकर मुस्कराते है
कहते है की मूर्ख थे तुम जों पकड़े गये करके सीता का अपहरण
हमे देखो हम रोज एक नई लडकी का अपहरण करके भी साफ़ बच जाते है
क्योंकि हम खादी पहनकर खुद को जनता का सेवक कहलाते है
और आकर दशहरे को पहनकर भगवान राम का मुकुट
बड़ी शान से तुम्हे आग लगाते है।
बोला कुम्भकर्ण के अब मेरी भी सुन लो भाई
है ये आरोप मुझ पर की मैने तुम्हे सन्मति नही सुझाई
पर मै तो तब गहरी नींद में सो रहा था
जब ये सारा कुकर्म हो रहा था
पर ये जो मुझे आज जलाने आया
ये तो जागते हुए भी सोता है
कभी जीजाजी देश लूटते है और कभी होती है पूर्ती से आपूर्ति
पर इसको म्मीजी पर पूरा भरोसा है
जलवाना है तो किसी ढंग के आदमी से हमे जलवाओ
इस कलयुग में हमे इन हमसे भी बड़े रावनो से बेआबरू मत करवाओ।
लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी
कल जब मै दशहरा देखने गया
तो सुना कि रावण ने कुम्भकर्ण से कहा
ये लोग हमे तो सदियों से जलाते है
पर क्या इनको ये जिन्दा रावण घुमते हुए नजर नही आते है।
इतना ही नही ये कलयुग के दुष्ट रावण हमे देखकर मुस्कराते है
कहते है की मूर्ख थे तुम जों पकड़े गये करके सीता का अपहरण
हमे देखो हम रोज एक नई लडकी का अपहरण करके भी साफ़ बच जाते है
क्योंकि हम खादी पहनकर खुद को जनता का सेवक कहलाते है
और आकर दशहरे को पहनकर भगवान राम का मुकुट
बड़ी शान से तुम्हे आग लगाते है।
बोला कुम्भकर्ण के अब मेरी भी सुन लो भाई
है ये आरोप मुझ पर की मैने तुम्हे सन्मति नही सुझाई
पर मै तो तब गहरी नींद में सो रहा था
जब ये सारा कुकर्म हो रहा था
पर ये जो मुझे आज जलाने आया
ये तो जागते हुए भी सोता है
कभी जीजाजी देश लूटते है और कभी होती है पूर्ती से आपूर्ति
पर इसको म्मीजी पर पूरा भरोसा है
जलवाना है तो किसी ढंग के आदमी से हमे जलवाओ
इस कलयुग में हमे इन हमसे भी बड़े रावनो से बेआबरू मत करवाओ।
लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी