राजनीति के दबंग
हम राजनीति के दबंग है हम हर चीज हराम की खाते है
हम स्टेडियम से लेकर श्मशान में मौज उड़ाते है
हम स्टील,जमीन, स्पेक्ट्रम,ताबूत
और कुछ न मिले तो कोयला ही खा जाते है
और हम में से कुछ चिंदी चोर तो इतने टुच्चे है
की वो विकलांगो की साइकिल और कान की मशीने ही खा जाते है
हम सड़क के आदमी से बात नही करते
बस वोट लेने के लिए ही उसे अपना बाप बनाते है
और एक बार जब चुने जाए तो उसे पांच साल के लिए उसे भूल जाते है
हम तो इतने गिरे हुए है की बेईमानो को ही घर जवाई बनाते है
और जब उनके जीजा जी घोटाले पकड़े जाए तो
उनके बचाव में जान देने को भी आ जाते है
जब कोई प्रेस वाला बोले तो उसे सरे आम
प्रेस कांफ्रेंस में ही धमकाते है
और गवाहों को धमकाकर, बरगलाकर उनसे अपनी बात कहलवाते है
और जब वो हमारी बात कह दे तो हिजड़ो की तरह खूब तालिया बजाते है
हम है राजनीती के दबंग हम तो मरकर भी कुर्सी पर ही अपनी अंतिम यात्रा चाहते है
हम है राजनीती के दबंग हम राजनीती के सलमान कहलाते है .......हम राजनीति के सलमान कहलाते है .
प्रवीन चन्द्र झांझी
हम राजनीति के दबंग है हम हर चीज हराम की खाते है
हम स्टेडियम से लेकर श्मशान में मौज उड़ाते है
हम स्टील,जमीन, स्पेक्ट्रम,ताबूत
और कुछ न मिले तो कोयला ही खा जाते है
और हम में से कुछ चिंदी चोर तो इतने टुच्चे है
की वो विकलांगो की साइकिल और कान की मशीने ही खा जाते है
हम सड़क के आदमी से बात नही करते
बस वोट लेने के लिए ही उसे अपना बाप बनाते है
और एक बार जब चुने जाए तो उसे पांच साल के लिए उसे भूल जाते है
हम तो इतने गिरे हुए है की बेईमानो को ही घर जवाई बनाते है
और जब उनके जीजा जी घोटाले पकड़े जाए तो
उनके बचाव में जान देने को भी आ जाते है
जब कोई प्रेस वाला बोले तो उसे सरे आम
प्रेस कांफ्रेंस में ही धमकाते है
और गवाहों को धमकाकर, बरगलाकर उनसे अपनी बात कहलवाते है
और जब वो हमारी बात कह दे तो हिजड़ो की तरह खूब तालिया बजाते है
हम है राजनीती के दबंग हम तो मरकर भी कुर्सी पर ही अपनी अंतिम यात्रा चाहते है
हम है राजनीती के दबंग हम राजनीती के सलमान कहलाते है .......हम राजनीति के सलमान कहलाते है .
प्रवीन चन्द्र झांझी
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