2012 से 2013
वर्ष 2012 जाता जाता देश को एक बार फिर शर्मसार कर गया
क्या ऐसा ही होता है इंसान ये सवाल हमे परेशान कर गया
क्या यही होता है विकास ,ये एक बहुत बड़ा सवाल है
ये किस तरफ चल पड़ा है समाज
क्या ये आने वाले कल का आगाज है
आओ आज हम सब मिलकर ये शपथ उठाये
चाहे हो दामनी या हो निर्भय
हम सब मिलकर इस देश की बेटियों को सुरक्षित बनाये
आइये अपने देश को हर तरह के शोषण से मुक्त कराए
और कोई बलशाली किसी कमजोर पर अत्याचार न कर पाए
आओ 2013 आओ ,
और हमारे समाज को एक नई राह दिखाओ
भाईचारे, प्यार और सदभावना की ज्योति जलाओ
आओ 2013 आओ !
प्रवीन चन्द्र झांझी
वर्ष 2012 जाता जाता देश को एक बार फिर शर्मसार कर गया
क्या ऐसा ही होता है इंसान ये सवाल हमे परेशान कर गया
क्या यही होता है विकास ,ये एक बहुत बड़ा सवाल है
ये किस तरफ चल पड़ा है समाज
क्या ये आने वाले कल का आगाज है
आओ आज हम सब मिलकर ये शपथ उठाये
चाहे हो दामनी या हो निर्भय
हम सब मिलकर इस देश की बेटियों को सुरक्षित बनाये
आइये अपने देश को हर तरह के शोषण से मुक्त कराए
और कोई बलशाली किसी कमजोर पर अत्याचार न कर पाए
आओ 2013 आओ ,
और हमारे समाज को एक नई राह दिखाओ
भाईचारे, प्यार और सदभावना की ज्योति जलाओ
आओ 2013 आओ !
प्रवीन चन्द्र झांझी