Monday, December 31, 2012

2012 से 2013

वर्ष 2012 जाता जाता देश को एक बार फिर शर्मसार कर  गया
क्या ऐसा ही होता है इंसान ये सवाल हमे परेशान कर गया
 क्या यही होता है विकास ,ये एक बहुत बड़ा सवाल है
ये किस तरफ चल पड़ा है समाज
क्या ये आने वाले कल का आगाज है
आओ आज हम सब मिलकर ये शपथ उठाये
चाहे हो दामनी या हो निर्भय
हम सब मिलकर इस देश की बेटियों को सुरक्षित बनाये
आइये अपने देश को हर तरह के शोषण से मुक्त कराए
और  कोई बलशाली किसी कमजोर पर अत्याचार न कर पाए
आओ 2013 आओ ,
और हमारे समाज को एक नई राह दिखाओ
भाईचारे, प्यार और सदभावना की ज्योति जलाओ
   आओ 2013 आओ !

प्रवीन चन्द्र झांझी 

Sunday, December 23, 2012

मर्द कौन

मर्दानगी इज्जत लूटने में नही
मर्दानगी इज्जत बचाने में है
बहादुरी शोषण करने में नही
बहादुरी शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाने में है
हो सकता है की लड़किया नेताओ के घर में भी हो
पर वो तो सुरक्षा के घेरे में रहती है
ये तो आम आदमी की बेटी है जो
सड़को  पर अत्याचार सहती है
हमे इन घडियाली आंसुओ की नही
ठोस कारवाई की अपेक्षा है
जो कहते है खुद को युवा नेता
ये उनके दावो की परीक्षा है 
आओ हम सब मिलकर खाये शपथ कि
फिर किसी बलात्कारी के नापाक इरादे न पूरे होने देंगे
तोड़ देंगे उन हाथो को जो उठेगे समाज की बेटियों के तरफ
फिर किसी दामनी को खून के आँसू न रॊने देंगे II

प्रवीन चन्द्र झांझी 

Sunday, December 2, 2012

                                                  वजह 

हर अनजान चेहरे में हर वक्त
कुछ जानी पहचानी सी लकीरे क्यों ढूँढता हूँ
जिन्दगी की भागम-भाग में छूट गये जो
उन जाने पहचाने चेहरो का पता
इन अनजान चेहरो  से क्यों पूछता हूँ,

जब मिटाए तो वो अक्स दिल के रेगिस्तान से
तो न सोचा था ये कि 
कुछ धुंधली सी बिखरी हुई अस्पष्ट लकीरे
दिल में बाकी खिची रह जाएगी,
जिन्दगी की शाम के धुंधलके में
उन अधमिटी लकीरों पर चलकर
उन अनजान राहों से अपनी खोई हुई
मंजिल का पता बेसाख्ता जाने क्यों पूछता हूँ,

ये न जानता था कि
कुछ सपने इस तरह टूट जाते है
जाग तो गया नींद से मगर
रात के उन हमसफर का पता
दिन के उजालो से न जाने क्यों पूछता हूँ,

नही जान पाता वो वजह
कि  जब हो ही गये वो अनजान हमसे
तो उस वसंत के फूलो की खुशबू
इन पतझड़ की झाड़ियो में क्यों सूंघता हूँ

हर अनजान चेहरे में हर वक्त
कुछ जानी पहचानी सी लकीरे क्यों ढूँढता हूँ ............I

लेखक :  प्रवीन चन्द्र झांझी