Thursday, January 31, 2013

तन्हाई 
पूछा  इक दिन मेरे दिल ने मन से
कि  ये तन्हाई क्या होती है
बोला मन कि जब तन से हो अलग उड़ जाता है मन
तब वो तन से निकली हुई एक आह होती है
पूछा  इक दिन मेरे दिल ने मन से
कि  ये तन्हाई क्या होती है


यादो के पंखो पर बैठ कर मन जब
अतीत के आकाश में  उड़ जाता है
कभी रोता है कुछ याद कर और
कभी खुद ब खुद मुस्कराता है
पर है ये नियति जिस्म की
 के  फिर भी होठ उसके मुस्कराते है और
आँखे भी उसी की रोती है,
पूछा  इक दिन मेरे दिल ने मन से
कि  ये तन्हाई क्या होती है......................

है समुन्द्र तन्हाई का गहरा इतना कि
मन इसमें न जाने कंहा डूब जाता है
और वक़्त  की मृगतृष्णा में भटककर
जब ढूंढता है ख़ुशी के मोती इन समय की सीपियो में
तब जिस्म की इस किश्ती को
साँसों की पतवार ही  ढोती है

पूछा  इक दिन मेरे दिल ने मन से
कि  ये तन्हाई क्या होती है......................

पूछा फिर दिल ने की जब उड़ता है मन
 तो जिस्म ये तन्हाई का बोझ क्यों उठाता है
हंस कर बोल मन की 
जब आती है मिलन की बेला 
तो मिटकर जिस्म मन के साथ उड़ जाता है
जिन्दगी मौत के जब मिलती है गले 
तब हो जाता है तन्हा इतना इंसान कि 
फिर तन्हाई की गुंजाईश भी कंहा होती है
 पूछा  इक दिन मेरे दिल ने मन से 
कि  ये तन्हाई क्या होती है......................

प्रवीन चन्द्र झांझी
    






अंधे बहरो  की बस्ती 

अन्धो के इस शहर में दिया जलाने को मन नही करता
गूंगे - बहरो की इस बस्ती में आवाज भी लगाने को मन नही करता
कभी कभी मै बहुत अकेला हो जाता हूँ
इतना अकेला की हवा में उड़ने लगता हूँ
न कोई मुझे छु पाता है
न किसी के पास होने का एहसास मुझे हो पाता है
न अपने होने का एहसास मुझे रहता है
ये मन न कुछ सुनता है न कुछ कहता है
बस एक शून्य में ताकता रहता है
न कुछ खोता है न कुछ पाने को जी चाहता है
इस दुनिया की भीड़ को बस
 भागते हुए  ताकता सा रह जाता है
क्या खो गया है इनका और क्या खोज रहे है सब
ये सोच कर जी घबराता है
ये न पा सकने की कुंठा कंही इनके मन को भटका न जाए
यूं भागते-भागते थक कर कंही हारकर ये सो न जाए
जो कौमे थककर-हारकर सो जाती है
उनके आने वाली नसले सदा के लिए  अपनी पहचान खो जाती है
600 की देश की गुलामी को याद करके मन है डरता
मगर क्या करू जब देखता हूँ इन नेताओ की तरफ तो 

अन्धो के इस शहर में दिया जलाने को मन नही करता
गूंगे - बहरो की इस बस्ती में आवाज भी लगाने को मन नही करता