Monday, March 4, 2013

भोग रही है कुर्सी, कैसे कैसे भोग
उस पर आकर बैठ रहे दो कौड़ी के लोग ...

वाह वाह क्या बात है .....03.03.2013

आगे मेरी तरफ से .......

भोग रही है भोग रोये कुर्सी बेचारी
बैठ उसपर ईमानदार डाक्टर
बाँट रहा घोटालो की बीमारी,
इस बीमारी से भूखे मर रहे है लोग
पर ब्रह्मचारी नेता तो बैठे है ले परनारी को गोद
पर नारी की गोद में भी इनको शर्म न आई
एक नही है, कई कई  इन्होने ग्रहस्थी बसाई,
मरते दम तक नही मरता
 इनके मन का लोभ
है पांच साल बाद नही खींच फैंकते,
जब तक इनको लोग,
खींच कर फैंके लोग
मगर है उनकी परेशानी
हर नेता, हर दल की, है ये ही कहानी,
होसकती है ये कहानी, खत्म उसी रोज
सोच समझ कर डालेगे
जिस दिन हम अपना वोट 


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