बहाना
कौन कहता है की आदमी मरने के बाद अकेला जाता है
सच तो ये है की इंसान हमेशा ही अकेला रहता है
रिश्ते नातो की इमारत जो वो जीवन भर बनाता है
उसकी नीव में एक एक ईट स्वार्थ और उमीदो की लगाता है
जब ढहता है वो मकान तो फिर वो समझ पाता है
जिसने फसाये रखा उसको इस माया जाल में उसी का नाम तो जमाना है
सच तो ये है कि उसने बनाया था एक ताश के पत्तो का महल
उसे तो एक दिन टूटना ही था, बस मौत तो एक बहाना है
और वो अकेला आया, हमेशा अकेला रहा और उसे अब अकेला ही जाना है
निवेदक: प्रवीन चन्द्र झांझी
कौन कहता है की आदमी मरने के बाद अकेला जाता है
सच तो ये है की इंसान हमेशा ही अकेला रहता है
रिश्ते नातो की इमारत जो वो जीवन भर बनाता है
उसकी नीव में एक एक ईट स्वार्थ और उमीदो की लगाता है
जब ढहता है वो मकान तो फिर वो समझ पाता है
जिसने फसाये रखा उसको इस माया जाल में उसी का नाम तो जमाना है
सच तो ये है कि उसने बनाया था एक ताश के पत्तो का महल
उसे तो एक दिन टूटना ही था, बस मौत तो एक बहाना है
और वो अकेला आया, हमेशा अकेला रहा और उसे अब अकेला ही जाना है
निवेदक: प्रवीन चन्द्र झांझी
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